
जो वचन गीता में,
दिया वो निभाने आजा,
लाज द्रोपदी की फिर है लुटती,
बचाने आजा,
आजा आजा आजा आजा,
तर्ज – प्यार झूठा सही।
पाप का दुशाशन फिर से साड़ी,
देखो खिंच रहा,
और कलयुग का,
दुर्योधन कैसे चींख रहा,
आज भी पांडव,
घुटनो में सर दिए बैठे,
आज भी भीष्म और द्रोण,
मौन है कैसे,
फिर से अपनी वो,
लीला गिरधर दिखाने आजा,
तेरी गैया का,
आज कोई रखवाला नहीं,
उसको रोटी का,
टुकड़ा कोई देने वाला नहीं,
पाप का नाग कालिया है,
फन को फैलाए,
आ भी जा मोहन,
देर तुझको नहीं हो जाए,
कलयुग के नाग कालिये को,
नथाने आजा,
आज की मीरा,
नाम लेके तेरा रोय रही,
आज की राधा,
कान्हा बाट तेरी जोय रही,
फिर से शिशुपाल,
अपशब्द तुम्हे बोल रहा,
आज भी जयद्रथ,
अशुभ वाणी तुमको बोल रहा,
पापों के कीचक जयद्रथ को,
मिटाने आजा,
दुखो दर्दो की,
बारिश से तुम बचाओगे,
फिर से उंगली पे,
गिरी मोहन तुम उठाओगे,
आज के सुदामा और नरसी,
है पुकार रहे,
मीरा रसखान तेरा,
रस्ता है निहार रहे,
अपने भक्तो को फिर से रस्ता,
दिखाने आजा,
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