
की सिफत लिखा मैं तेरी ज्योत दी
जी मैथो सिफत लिखी न जावे
हो तक के माँ दी ज्योत दे वल नु
जी मेरा मन भर आवे
तेरी ज्योत विचो है दिसदा तेरा नूर दातिये,
रहे नाम तेरे दा चड़ेया सरुर दातिये,
जगदी ज्योत है ज्वाला बड़ी जगदी प्यारी लगदी
मेनू सारी काएनात तो न्यारी लगदी
तेरे नाम वाला है चडेया सरुर दातिये,
तेरे भगता ने मैया तेरी ज्योत जगाई आ
औना मैया ने जरुर सब ने आस लगाई ऐ,
कदे करी न तू चरना तो सहनु दूर दातिये,
सिंह जसी वी कमल नाल गल्ला करदा,
नीले वालिया सेवक पका तेरे दर दा,
माफ़ करी अनजान दे कसूर दातिये,
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