
झर झर बरसे नैना
खाटू वाले तेरे रहते झर झर बरसे नैना,
इतना बता दे ये दुःख मुझको कब तक और है सेहना,
झर झर बरसे नैना,
तुझको निहारु मैं तुझको पुकारू मैं,
सुनता नहीं क्यों बात मेरी तू इतना तू क्यों तड़पाये,
क्यों न हाथ बढ़ाये,या तो कह दे छोड़ दू मैं तुझसे,
अब मैं कुछ भी कहना,
तुमसे ही आस बंधी सुख की प्यास जगी,
किस दर जाऊ किस को रिजाऊ,
दिल तेरा क्यों न पसीजे बैठा है अँखियाँ मीचे,
भव सागर के तूफानों में कब तक और है बहना,
हारे का सहारा है सब को भा रहा है,
सुन ओ कन्हियाँ मेरी भी नाइयाँ क्यों न पार लगाये,
दास ये डूभ न जाये,मैं भी हु हारा देदे सहारा,
तुझ बिन अब नहीं है रहना,
मैं भी हु दास तेरा,तू विश्वाश मेरा,
सिर पर मेरे हाथ जो फेरे सुन ने ओ सांवरियां,
चोखानी के तुझ बिन बाबा कट ते नहीं दिन रहना,
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