
झुंझुनू में लगाकर बैठी जो दरबार है
Jhunjhunu Mein Lagaakar Baithi Jo Darabaar Hai lyrics
झुंझुनू में लगाकर बैठी जो दरबार है,
वो झुँझन वाली मेरी पालनहार है,
उनके ही इशारों चलता ये संसार है,
पालनहार है खेवनहार है,
झुंझनु में लगाकर बैठी जो दरबार है,
तर्ज – कब तक चुप बैठे।
बन जाए बिगड़ी सबकी,
ये बिगड़े काम बनाती,
बच्चों को दादी अपने,
है पलकों पर बिठाती,
इनकी ममता के आगे सब बेकार है,
दुनिया में सतिया बहुत हैं,
सिरमौर है मेरी दादी,
है कलयुग की अवतारी,
जिसे पूजे दुनिया सारी,
भक्तों के भरती ये तो भण्डार है,
दुनिया ठुकराए जिसको,
उसे दादी गले लगाती,
जग में पहचान बने,
इस लायक मैया बनाती,
‘अशोक’ के सर पे भी माँ तेरा हाथ है,
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