
तू एक बार आजा,
गिरिराज की शरण में,
महाराज की शरण में,
तू रंक हो या राजा,
देखे – श्री गिरिराज वास मैं पाऊं।
बिसरे विपिन बिहारी,
संग में है राधा प्यारी,
परिकम्मा एक लगाजा,
इंद्र ने कोप कीन्हा,
बृज को बहाय दूंगा,
मेघों को बुलाकर के,
बरसात करा दूंगा,
इन्द्र का मान मारा,
उत्सव महान होते,
जप-ध्यान-दान होते,
नित दीप-दान होते,
संतों के दर्श होते,
भगतों के दर्श होते,
चरणों में धोक लगाजा,
गागर सुयश की भरले,
संतन का संग करले,
भगतों का संग करले,
भव सिंधु पार करजा,
कुंजों में ध्यान धरले,
कृष्ण गुणगान कर ले,
मीठी चिनौरी खाजा,
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