
तू रुक नहीं पाएगा,
बाबा जो तुझको बुलाएगा,
झूठे बहाने करके,
तू पछतायेगा,
तर्ज – किस्मत वालों को।
साथ वो मेरे मैं क्यों डर जाऊं,
श्याम की जय बोलूं और बढ़ जाऊं,
अब तक श्याम ने हमें संभाला है,
क्यों ना मैं उनसे मिलने जाऊं,
नैनो के आंसू लेके,
श्याम ध्वजा को लेके,
मन हर्षाएगा,
खाटू वाले श्याम से मिलना है,
दिल की बाते उनसे करना है,
वैसे तो वो सबकुछ जाने है,
फिर भी मन को हल्का करना है,
चरणों में शीश झुका के,
दर्शन पाएगा,
श्याम मिलन में आई बाधा है,
मिलने का तो पूरा इरादा है,
चाहे जितने नियम बना ले वो,
भक्तों से मिलने बाबा बैठे है,
प्रेमी को आता देखे,
गले लगायेगा,
रींगस से खाटू के मंदिर तक,
पैदल चलकर हमको जाना है,
भले निशान चढ़ा नहीं पाए हम,
सारे रस्ते महिमा गाना है,
भाव का भूखा है ये,
भाव ही भाएगा,
प्रेषक – निलेश मदनलाल खंडेलवाल।
धामनगांव रेल्वे – 9765438728
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