
दुनिया चाहे जो भी बोले,
बिल्कुल ना घबराना,
रख सच्चा विश्वास हृदय में,
आगे बढ़ते जाना,
तेरा साथी खाटू वाला है,
तर्ज – मिलने की तुम कोशिश।
नींद भगत को ना आये तो,
श्याम भी सो ना पाते,
अपने भगत को खिलाएं बिना,
ये खुद भी ना खा पाते,
अपने दिल की बात,
बताने में तुम ना शरमाना,
अपने भक्तों के खातिर ये,
नीत नए खेल रचाते,
बिगड़े खुद का मान मगर,
भक्तो का मान बढ़ाते,
दुनियां की झूठी बातो में,
धीरज ना गंवाना,
साथी मेरे श्याम के जैसा,
कहीं नही पाओगे,
रिश्ता इनसे जोड़के ‘मोहित’,
भव से तर जाओगे,
भाव के भूखे है बनवारी,
भाव से इन्हें रिझाना,
गायक / प्रेषक – परितोष मिनी।
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