
तेरी दया से श्याम मेरा सजने लगा संसार
तेरी दया से श्याम,
मेरा सजने लगा संसार।।
श्लोक – दिल की लगी में,
और दिल्लगी में ,
फर्क बड़ा है भारी।
दुनियाँ वाले क्या समझें,
उसे समझें श्याम मुरारी।।
तर्ज : दर्पण को देखा।
मिलती है खुशियाँ मुझको-2,
मिलता है जो तेरा प्यार-2,
तूने अपने दीवानो की,
दुनिया श्याम सजाई है,
मेरा दिल ना नरसी मेहता,
ना ही मीरा बाई है,
फिर भी मुझको मनमोहन-2,
तुम रखते अपने द्वार-2,
जब-जब तुमको याद किया था,
तब-तब मोहन आये हो,
कुछ भी पास नहीं था मेरे,
फिर भी तुम अपनाये हो,
जीवन की धारा बदल दी-2,
जैसे गंगा की धार-2,
‘ओम’ प्रेम को नजर लगे ना,
बस इतना ही ध्यान रहे,
इसी तरह मेरे मन मोहन,
सब भक्तों का मान रहे,
जिसने समझा है तुमको-2,
वो बना गले का हार-2,
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