
तेरी भोली सी सूरत सांवरियां,
मेरे दिल में वसि जा रही है,
अब तो पहले से भी तेरी ज्यादा,
ना जाने क्यों याद आ रही है,
उन गोपियों से हम को मिलाना रास करते कहा वो बतादो,
प्यारी प्यारी कदम बिल की छइयां मेरे मन को तड़पा रही है,
मिल भी जाओ ये रिश्ता पुराना,
कहा मिलो गे बता दो ठिकाना,
तुम को भूले पड़े हम कन्हियाँ,
अब चतेह की समज आ रही है,
तेरी घुंगराली अलखो में गुजारी,
मेरी प्यासी ये दोनों आंखे,
कौन जाने मेरे इस मन की याद आद्दत बनी जा रही है,
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