
तेरी मोर छड़ी के सायें में,
जो भी आ जाते है,
चाहे निर्धन हो या निर्बल हो,
वो सब तर जाते है।।
तर्ज – उस बांसुरी वाले की।
जब जब दुनिया से हारा,
मेरे श्याम तुझे ही पुकारा,
तेरे तीन बाण का चिन्ह भी,
देता है मुझे सहारा,
खाटू में बैठे श्याम धणी,
सब दुःख हर जाते है,
कलयुग अवतारी बाबा,
श्री श्याम स्वरुप कहाए,
खाटू में बैठा बाबा,
अपनी सरकार चलाए,
जो हार के दर पे आए,
वो जीत जाते है,
तेरा नाम जगत में प्यारा,
जो लेता इसका सहारा,
तू दीन बंधू दुखहर्ता,
तू ही हारे का सहारा,
जिसने भी श्याम पुकारा,
उसके हो जाते है,
गैरो की बात करे क्या,
अपनों ने हमें सताया,
बन गई जिन्दगी मेरी,
जबसे खाटू हूँ आया,
कहता ‘अमित’ ये बाबा,
हर बात निभाते है,
स्वर – अमित शेरेवाला।
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