
तेरे दर पे मेरे माधव,
ये शीश झुकाया है,
बाबा हार के आया हूँ मैं,
दर दर का सताया हूँ,
तेरे दर पर मेरे माधव,
तर्ज – एक प्यार नगमा है।
चौखट पे गया सबकी,
हर मंदिर में भटका हूँ,
आखिर तेरे तोरण पर,
अपना सर रखता हूँ,
सुनता हूँ तेरी रहमत,
दिन रात बरसती है,
जिनसे भी उम्मीदे थी,
उन सबने रुलाया है,
रो रो कर गम पूछे,
हस हस कर उड़ाया है,
विश्वास तुझी पर है,
नैया पार लगानी है,
अब आस तुम्ही से है,
ऐतबार तुम्ही पे है,
‘मयूर’ का सेठ है तू,
अरदास तुम्ही से है,
अश्को के सागर को,
हरी आकर के संभालोगे,
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