
तेरे पहरे बिन बालाजी महारः भुत बड़ें जा से
तेरे पहरे बिन बालाजी,
महारः भुत बड़ें जां सं।।
सब क्यांए में हो स घाटा,
घर के पित्र करं सं टाटा,
गई लक्ष्मी दुर यो टोटा,
खुब छिड़ै जा स,
तेरे पेहरे बिन बालाजी,
घर में कलह रह.बलकारी,
होणी चले होण की मारी,
करदे ने पोंबारा काणे,
तीन लड़े जां स,
पेशी झुमे जा स घर में,
चौगरदे तं लिया सुं घिर मैं,
बाजः रोज मटाक लड़ाई,
खुब लड़े जा स,
छोटी पुलिया पाई कोना,
राजपाल मन्नै हरगिज टोणा,
अशोक भक्त दुख पाया,
न्युं के छंद घड़े जां सं,
गायक – नरेन्द्र कौशिक।
भजन प्रेषक – राकेश कुमार जी,
खरक जाटान(रोहतक)
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