
थाम लो पतवार प्रभूजी थाम लो पतवार,
अब थाम लो पतवार, प्रभूजी थाम लो पतवार,
सागर गहरा नाव पुरानी, जाना है भव पार,
थाम लो पतवार प्रभूजी.......
डूब रहा आशा का सूरज, आ भी जाओ भगवन,
राह दिखाओ गुमराहों को पार लगाओ भगवन,
ढूँढ रहे हैं साहिल कब से, हम बेबस लाचार,
गूँज रहे तूफ़ान भयंकर जीवन के सागर में,
गरज रहीं घनघोर घटायें नयनों के अम्बर में,
टेर सुनोगे कब हम सब की, कब से रहे पुकार,
उठती गिरती लहरें देख के मन खाए हिचकोले,
सर सर करती चलें हवायें डगमग नैया डोले,
आ भी जाओ पार लगाने, बनके खेवनहार,
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