
थारी बाट जोवे बाई सुगना आवो म्हारा भाई
थारी बाट जोवे बाई सुगना,
आवो म्हारा भाई,
आवो मारा भाई,
काई भूल पडगी बीरा,
याद मै ना आयी,
बालपने री बाली उमरियाँ,
पुंगल गढ परणाई,
सासरिया मे मानस मिलीया,
तो भी क्रूर कसाई,
रात रात रोवे सुगना,
सारी रेण जागी,
रूनीचा मे मारो मनडो बसीयो,
वे बचपन री बाता,
सुख रो सूरज आप गियो रे,
पुंगल गढ मे आता,
हसन खेलन री मन मे रेगी,
होगी मे अभागी,
सुगना मनावे काग उडावे,
कदे मारो बीरो आवे,
पडीयारा रो गरब मिटावे,
कद रूनीचे ले जावे,
सोवत जागत सुगनचीडी ज्यु,
झुरवाने लागी,
लीले चढने रामदेवजी,
पुंगल गढ मे आया,
गले लगाई सुगना बहन रा,
सगला कष्ट मिटाया,
करणीसुत सुगना री काया,
हरखन लागी,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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