
थारे खुशी पड़े तो मानजे रे,
सतगुरु समझावे रे।
दोहा – अमल तंबाकू छुतरा,
सुरा पान सु हैत,
नानक नरका जाएगा,
अपने कुल के समेत।
अमल तंबाकू छुतरा,
उतर जाए प्रभात,
नशा करो श्री राम का,
चड़िया रेवे दिन रात।
चाय खागी कालज्यो,
चुस लियो सब खून,
दुखन लागा हाडक्या,
चढ़बा लागी ऊन।
गणी कमजोरी छाई,
रूम रूम में रम गई,
जोर नहीं करें दवाई।
इंदिरा गांधी का राज में,
होटल के लागी लाई,
केवै घनश्याम धनी,
मुश्किल छूटे चाय।
गुरु ज्ञान बतावे रे,
मन बैठ ज्ञान के गोखडे,
मन गेले गेले चालनो रे,
उबट मत चाले रे,
उबट चाले कांटो भागे,
ठोकर लागे रे,
डोडी बांधे पागडी रे,
काई छाया निरखे रे,
चार दिना की रूप जवानी,
खाली जासी रे,
पर घर को कहीं बैठणो रे,
कहीं मान घटावे,
मान घटावे आपनो,
नर बात बनावे रे,
पर नारी की दोस्ती रे,
कछु काम न आवे रे,
जोबन खोवे हाथ से,
हियो हाथ न आवे रे,
उसर खेती बावणी रे,
मत बीज गमावे रे,
बीज गमावे गांट को,
कछु हाथ न आवे रे,
गांव खंडेला पालड़ी जी,
खाती बक्सौ जी गावें रे,
छोडा छोले प्रेम का यो,
भजन बनावे रे,
गायक / प्रेषक – मदन मेवाड़ी।
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