
दया की आस में भगवन तेरे दरबार आया हूँ
दया की आस में भगवन,
तेरे दरबार आया हूँ,
बना लो दास मुझको भी,
बहुत लाचार आया हूँ,
तर्ज – अवध में राम आए है।
सुना हूँ तुम गरीबों के,
सदा उद्धार करते हो,
तो हाजिर हूँ गरीबों के,
स्वयं सरदार आया हूँ,
अगर तुम दीन के दाता,
तो मेरी दीनता सुन लो,
जगत के मोह में डूबा,
मैं एक गुनेहगार आया हूँ,
है ‘सच्चिदानंद’ की विनती,
प्रभु स्वीकार कर लेना,
सदा ‘धीरज’ को शरणागत,
मिले सरकार आया हूँ,
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