
दर दर भटकने वाले,
बाबा से दिल लगाले,
जीवन की नाव अपनी,
कर श्याम के हवाले,
तर्ज – वो दिल कहाँ से लाऊँ।
दर दर पे भटकने से,
कुछ भी नही मिलेगा,
जख्मों पे तेरे मरहम,
बस श्याम ही मलेगा,
आकर दिखा प्रभु को,
अपने जिगर के छाले,
सुख की घड़ी में तुझको,
सब बाहों मे भरेंगे,
दुख की घड़ी में तुझसे,
सब फासला करेंगे,
मौका परस्त है ये,
सारे जमाने वाले,
इनकी शरण में आकर,
महफूज तुम रहोगे,
इनकी कृपा को पाकर,
मजबूत तुम रहोगे,
ये सौ कदम बढ़ेगा,
तू दो कदम बढ़ा ले,
‘माधव’ जरा संभल जा,
दुनिया बड़ी बुरी है,
लब पे शहद है इनके,
और हाथ में छुरी है,
चेहरे के साफ जितने,
उतने ही मन के काले,
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