
दशरथ के राजकुमार,
वन में फिरते मारे मारे,
दुनिया के पालनहार,
थी साथ में जनक दुलारी,
पत्नी प्राणों से प्यारी,
सीता सतवंती नार,
भाई लखन लाल बलशाली,
उसने तीर कमान उठा ली,
भाई भाभी का पहरेदार,
सोने का हिरण दिखा था,
उसमें सीता हरण छिपा था,
लक्ष्मण रेखा हो गई पार,
हनुमान से मेल हुआ था,
सुग्रीव भी गेल हुआ था,
वानर सेना की तैयार,
लक्ष्मण बेहोश हुए थे,
तो राम के होश उड़े थे,
रोये नारायण अवतार,
दुष्टाचरण हुआ था,
तो रावण मरण हुआ था,
उसका तोड़ दिया अहंकार,
जब राम अयोध्यया आए,
घर घर में दीप जलाये,
मनी दीवाली पहली बार,
जब अवध में राम पधारे,
चहुँ ओर थी जय जयकार,
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