
दिल चोरी साडा हो गया श्री मेहंदीपुर मंदिर में
दिल चोरी साडा हो गया श्री मेहंदीपुर मंदिर में,
और मैं भी दीवाना हो गया श्री उत्तरमुखी के मंदिर में,
मुस्काये जो सरकार
हो गया इक पल में ही प्यार,
अब मैं इस से ज्यादा क्या कहु,
जन्मो का रिश्ता होगया श्री उत्तरमुखी के मंदिर में,
दिल चोरी साडा हो गया श्री मेहंदीपुर के मंदिर में,
जादू टोना कर देता ऐसा है ये जादूगर,
विश्वाश नहीं है मेरा तो आकार देखो उत्तरमुखी
सारा जग पीछे हो गया, श्री उत्तरमुखी के मंदिर में,
छोटा सा है ये मंदिर सब कुछ है इसके अंदर,
जो हार के दर पे आता वो बन जाता है सिकंदर,
निर्धन भी राजा हो गया श्री उत्तरमुखी के मंदिर में,
दिल चोरी साडा हो गया मेहंदीपुर के मंदिर में,
सेठो का सेठ कहाता दोनों हाथो से लुटाता,
जो सच्चे मन से आता जीवन भर मौज उड़ाता,
मन चाहा पूरा हो गया, श्री उत्तरमुखी के मंदिर में,
प्रकाश हुआ मत वाला तूने ऐसा जादू कर डाला,
सारी दुनिया से बढकर लगता है मेहंदीपुर वाला,
तेरा जग ये दीवाना हो गया श्री उत्तरमुखी के मंदिर में,
लेखक :- ठा. प्रकाश सिंह चौहान
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