
दुनिया में धाम हजारों हैं, मेरे श्याम बिहारी का क्या कहना
तर्ज: दुनिया में देव हजारों हैं, मेरे बजरंगी का क्या कहना
दुनिया में धाम हजारों हैं, मेरे श्याम बिहारी का क्या कहना।
घड़साना में दरबार सजा है, मेरे लखदातार का क्या कहना॥
यहाँ श्याम, बिहारी, बजरंगी, तीनों रहते संग-संग हैं।
तीनों की महिमा न्यारी है, तीनों भक्तों के अंग-संग हैं।
जिसने श्रद्धा से शीश झुकाया, भर दी उसकी झोली है।
श्याम हमारे शीश के दानी, बिगड़ी बात बनाते हैं।
बाँके बिहारी मुरली वाले, प्रेम की धारा बहाते हैं।
बजरंग बजरंगबली संकटमोचन (संकट हारते), पल में दौड़े आते हैं।
बागा वस्त्र की महिमा ऐसी, रोगी भी मुस्काते हैं।
संतान सुख के दाता बनकर, सूना आँगन महकाते हैं।
रुके हुए सब काम बनाकर, सबकी लाज बचाते हैं।
दूर-दूर से भक्त हैं आते, लेकर मन में आस यहाँ।
जो भी आया दर पे इनके, भर दी झोली पल भर में।
“विकास” भी तेरे दर का दीवाना, गाता रहे गुणगान सदा।
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