
दूर से चल के आया, दूर से चल के आया,
तेरे दरबार माँ, तेरे दरबार माँ,
दास खड़ा तेरे दर्शन को,
मैया पहाङावाली माँ मेरी शेरावाली,
दूर दूर से माँ भक्त तेरे द्वारे आते है,
तेरे द्वारे आते है प्रेम से दर्शन पाते है,
ऊँचे पर्वत मे मैया, ऊँचे पर्वत मे मैया,
तेरा दरबार माँ सोहणा दरबार माँ,
ध्यानु जैसे माँ भक्त तूने लाखो तारे है,
मधुकैटभ जैसे राक्षस मैया तुने मारे है,
भक्तो के लिऐ मैया, भक्तो के लिऐ मैया,
अकबर अहंकारी माँ तुझे अजमाने आया था,
तेरी ज्योत बुझाने को लोहे का तवा चढांया था,
तवे फाड़ निकली ज्वाला हुआ,
जय जय कार माँ, जय जय कार माँ,
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