
हो श्रद्धा और विश्वास की मन में
ज्योत जगानी चाहिए
माँ का दर्शन हो जायेगा
बस सच्ची नियत होनी चाहिए
हाँ बड़ी दूर से आया चलके
मैं ऊँचा पर्वत चढ़के
मैया को मनाने आया
चुनरी को चढाने आया
बड़ी दूर से आया चलके
ये गुफा ये सुन्दर द्वारा मेरे मन को भा गया
सब काम काज मैं छोड़ छाड़ दर्शन को आ गया
और मैंने मैया को जैसे किया याद
देखो जी देखो शेर आ गया
मैंने मैया को जैसे किया याद
और बोला तेरा यहाँ पे क्या काम
बोला तेरा यहाँ पे क्या काम
वो पीला पीला शेर आ गया
हाँ फिर शेर गरज के बोला
यहाँ क्यूँ आये हो लाला
है किसने तुम्हे बुलाया
दरबार में डेरा डाला
अरे मैं एक बड़ा व्यापारी
बड़ी जय जयकार हमारी
मैं खाली हाथ ना आया
सोने का छतर भी लाया
एक से एक धनवान है आते
पर माँ को नहीं है भाते
माता को वही लुभाते
जो सच्चे मन से आते
अरे छोड़ के सारे तू आडम्बर इतना याद कर
फिर दर्शन देगी मैया पहले मन को साफ़ कर
और समझाई सिंह ने मुझको बात
हाँ हाँ मैया को मैंने किया याद
और समझाई मुझको उसने बात
हाँ समझाई मुझको उसने बात
सुन शेर की सारी बाते
मेरी बात समझ में आयी
झूठी दुनिया की दौलत
साचा तेरा दर है माई
जो कुछ भी मैंने जोड़ा
वो संग नहीं जाएगा
जो दया दृष्टि हो जाए
तो भव से तर जाएगा
फिर शेर बोला
अब तुम्हे बात समझ में आ रही है
और आगे बोला
दौलत जो तूने जोड़ी सत्कर्म में इसे लगाओ
कभी भंडारा करवाओ कोई कन्या ब्याह करवाओ
फिर भा जायेगा मैया को तू मैया दर्शन देगी
और हाथ रखेगी सिर पे तेरे सब दुखड़े हर लेगी
दूर किया रे अहंकार
मेरा दूर हुआ रे अहंकार
खोले मन के है उसने मेरे द्वार
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