
बस इतनी सी किरपा कर दो,
मेरे उज्जैन के महाकाल,
दे दो अपनी नोकरी,
उज्जैन के महाकाल,
तेरा उपकार होगा,
हर दिन बाबा रोज सुबह शाम,
तेरे दर पर आऊंगा,
जल बेल पत्र भंगिया फूलो से,
तेरा श्रंगार सजाऊंगा
उज्जैन नगरी बाबा तेरी,
दुनिया में है महान,
उज्जैन सो कोई धाम नही,
और महाकाल सो नाम नही,
कहलाते उज्जैन के राजा,
महाकाल तुमसा ना कोई,
मुझे दे दो अपनी नोकरी,
मेरे खुल जाए सब भाग,
ना ही भटक तू जगत में बंदे,
एक सहारा तेरा ये,
सारी दुनिया झूठा झमेला,
सच्चा साथी एक ही ये,
अंत समय जो आया,
तो आएगा तु भी यहां,
लवप्रीत विश्वकर्मा।
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