
द्वारे चलिए मैया के,
द्वारे चलिए,
ले आया सावन का महीना,
लेने नज़ारे चलिए,
रिमझिम रिमझिम सावन बरसे,
आई रुत मतवाली,
जय माँ जय माँ कोयल बोले,
बैठ आम की डाली,
ऊँचे पर्वत भवन सुनहरा,
छाई है हरियाली,
पिंडी रूप विराजे मैया,
भक्तो की प्रतिपाली,
द्वारे चलिए मईया के,
भक्तो के चल पड़े है टोले,
लाल ध्वजा फहराते,
झांझ मजीरा ढोलक ले,
गुणगान मैया के गाते,
पाओं में पड़ गए है छाले,
फिर भी चलते जाते,
लाख मुसीबत आए,
माँ के भक्त नहीं घबराते,
हो आया सावन का महीना,
छोड़ मोह दुनिया का ‘लख्खा’,
बन जा माँ का चाकर,
करले अपनी सफल जिंदगी,
माँ की शरण में आकर,
सच है कितने पापी तर गए,
माँ की महिमा गाकर,
फिर बोल ‘सरल’ तू जय माता की,
दोनों हाथ उठाकर,
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