
नखरारौ सांवरियो,
तुझे तेरे दास बुलाते है,
नैनों के भरे प्याले,
प्रभु दर्शन को तरसते है,
तर्ज – आ लौट के आजा मेरे मीत।
तुम हो दयालु मालिक हमारे,
भगतों की तुम कब सुनोगे,
बुझने लगी है नैनों की ज्योति,
कब तक उजाले करोगे,
बिगड़ी हुई बातों को,
प्रभु पल भर में बनाते हो,
कब तक रहोगे अन्जान हमसे,
कितनी परिक्षा तुम लोगे,
चलने लगी है दिल पे कटारी,
अपने भगतो की प्रीत की रीत,
प्रभु आकर के निभा जाओ,
चन्दा से सुंदर मुखड़ा तुम्हारा,
लागे ना तोहे नजरिया,
आजा मुरारी नजर उतारू,
ले ले के तौरी नजरिया,
इक बार तो आ जाओ,
काहै मन को दुखाते हो,
यह भजन विनोद कुमार जी
9212067422 द्वारा भजन डायरी,
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