
नमामि नमामि अवध के दुलारे,
खड़ी हाथ बाधे मैं दर पे तुम्हारे,
ना करती हूं भक्ति ना जप योग साधन,
कैसे कटेंगे ये माया के बंधन,
दुखी दीन होकर ये मनवा पुकारे,
भवर में पड़ी हैं आकर ये नईया,
सहारा ना दूजा एक आस तेरी,
तू बन के खेवइया लगादे किनारे,
विनती यहीं है प्रभु के चरणों में,
आए है हम सब तुम्हारे शरण में,
करो दूर अवगुण जो है हमारे,
"मधुर भजन बेला"
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