
भंगियाँ जरा पीस दो ओ गोरा रानी,
नसेड़ी बनाना छोड़ दो ओह भोले वरदानी
आज बड़ी मुश्किल से लाया हु ढूंढ के,
पूरा कैलाश आज आया हु घूम के,
मान जाओ गोरा करो न मन मानी,
नई नई बहु आई है अपने घर में इज्जत रहे गी क्या उसकी नजर में,
पीस दो भंगियाँ बनाओ न कहानी,
मायके तो भेज उसे रिद्धि के साथ में,
पीसो न भंगिया गोरा बैठो मेरे पास में,
खाये गी का सुन मेरी बहु रानी,
तुम सा गणजेडी न देखा भंगेड़ी
पाया है मैंने ये कैसा नसेड़ी,
रखो सिलवाता तुम लेके आओ पानी,
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