
नाचते-नाचते मीरा गाने लगी,
आज हमको हमारा सनम मिल गया,
दर्द पैदा हुआ आज उनको मेरा,
मेरा उजड़ा हुआ फिर चमन खिल गया,
हाथ रख कर के सर पर प्रभु पूछते,
क्यों दीवानी हो तूने बुलाया मुझे,
तेरी आवाज ने चैन सबको दिया,
शेष शैया पर आसन मेरा हिल गया,
मेरी ख्वाहिश है अपने सनम से मिलूं,
इस तमन्ना में मैंने जहर पी लिया,
सर्प से जब श्रीमाला बनी फुलकी,
तेरा परिचय दो हमने तभी पा लिया,
एक दिन मन में यूं सोचने में लगी,
अपने भक्तों से जाकर में कैसे मिलूं,
गम की दरिया में जाकर में बहने लगी,
बहते बहते किनारा मुझे मिल गया,
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