
नाचे नन्दलाल
नाचे नन्दलाल, नचावे हरि की मईआ ॥
नचावे हरि की मईआ , नचावे हरि की मईआ ,,,
मथुरा मे हरि जन्म लियो है ॥
गोकुल मे पग, धरो री कन्हैया॥
रुनुक-झुनुक पग घुँघरू वाज़े ॥
ठुमुक-ठुमुक पग, धरो री कन्हैया॥
धोतो न बांधे लाला जामो न पहिरे ॥
पिताम्बर को, बडो रे पहरैईया॥
टोपी न ओढ़े लाला साफा न बांधे ॥
मोर-मुकुट को, बडो रे ओढैईया॥
शाल न ओढ़े लाला दुशाला नहीं ओढ़े ॥
काली रे कमरिया को, बडो रे ओढैईया॥
ढूध न पीवे लाला, दही नहीं खावे ॥
माखन-मिसरी को, बड़ो रे खवैईया॥
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