
नाथ जालन्धर तपधारी,
दोहा – नाथ जालन्धर आपरी,
महिमा अपरंपार,
साचे मन सु जो कोई सिवरे,
करजो बेडा पार।
पहाडों में लीला है थारी,
नाथ जालंधर तपधारी ओ जी।।
जालौर नगरी सिरे मिन्दर मे,
मूरत थारी है प्यारी,
नाथ जालंधर तपधारी,
भंवर गुफा मे करी तपस्या,
जिनरी महिमा है भारी,
थलसाथल पर भवन आपरो,
दर्शन आवे नर नारी,
चार खुट मे किरत भारी,
सिवरे योगी संसारी,
दीन दुखी रा दुखडा मेटो,
भीड़ पडे नित भगता री,
दास अशोक सुनावे दाता,
अरजी सुनलो थे म्हारी,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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