
ना गोरा है ना काला ये मोहन मुरली वाला
ना गोरा है ना काला,
ये मोहन मुरली वाला,
है सांवली सूरत इसकी,
जिसने जादू कर डाला।।
जाने क्यों मन मोहन के,
सब लोग है यूँ दीवाने,
इस भीड़ भरी दुनिया में,
बस श्याम को अपना माने,
हर बच्चा बूढ़ा इसकी,
चाहत में है मतवाला,
कजरारी आँखे इसकी,
नैनो में प्यार का सागर,
कोई बच के ना जा पाए,
इसके मंदिर में आकर,
इसके तिरछे नैनो का,
हर सेवक है मतवाला,
नखराली इसकी अदाएं,
चेहरे पे भोलापन है,
होंठों पे प्यारी बंसी,
जिसमे एक प्रीत की धुन है,
जब बंशी धुन लहराए,
‘अंकुश’ भी हो मतवाला,
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