
ना ही किनारा ना ही सहारा किसी की ना दरकार
ना ही किनारा ना ही सहारा,
किसी की ना दरकार,
जो संग में तू मेरे,
जो संग में है तू मेरे,
तर्ज – हनुमान भरोसा तेरा है।
क्या करना है किनारे का,
क्या करना है सहारे का,
भव से वो तो पार हुआ,
जो नौकर इस प्यारे का,
नदी किनारे नैया डूबी,
देखि सौ सौ बार,
प्रभु क्या खेल तेरे,
जिसपे भरोसा करते थे,
काम मेरे वो आएगा,
देगा मुझे सहारा वो,
नैया पार लगाएगा,
उनके चलते अटक गई थी,
नैया मेरी मझधार,
नैया ले मझधार खड़ा,
याद आई मुझे तब तेरी,
मेरे हाथ को थाम लिया,
पलभर भी ना की देरी,
‘श्याम’ कहे उस दिन से मेरा,
बन गया पालनहार,
स्वर – संजय मित्तल जी।
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