
नुगरा रे मुंडे राम नी आवे,
केसर गुल गई गारा में,
पापी रे मुखड़े राम नी आवे,
मोनको जमारो एडो मती खोवो,
सुखरत करलो जमारा में ए हा।।
भैस पद्मनी ने हार पेहरायो,
आ कई जाने हारा मे,
भैस पद्मनी ने हार पहरायो,
आ कई समझे हारा मे,
ओड नी जाने पेरनी जाने,
जन्म गमायो गारा मे,
काच महल में कुती सुलाई,
रंग महल चोबारा मे,
एक कांच में दोई दोई कुतीया,
बुस बुस मरगी जमारा मे,
हिरो ले मूर्ख ने दिनो,
दलवा बैठो सारा मे,
हिरा री गत जवेरी जाने,
कई खबर है गवारा ने,
कई खबर है गिवारा ने,
शील धर्म तो आदु मारे,
दया धर्म तलवारो मे,
अमरनाथ संतो रे शरने,
जीत गयो जमद्वारा मे,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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