
नैया अटक गयी बीच भवरिया,
दोहा – गुरु मूरत मुख चंद्रमा,
सेवक नैन चकोर,
अष्ट पहर निरख़त रहूँ,
मैं गुरु चरणन की ओर।
हे राजा राम मेरी ले लो खबरिया,
ले लो खबरिया मेरी ले लो खबरिया,
आरती वंदन मैं नहीं जानू,
मैं तुझे अपना इष्ट है मानु,
दया दृष्टि की मोपे कर दो नजरिया,
रोज सवेरे राहें निहारूं,
दिन और रात बस तुमको पुकारूँ,
राहें तकत मेरी थक गई नजरिया,
नैया अटक गई बीच भवरिया,
गायक – श्री हल्केराम जी कुशवाह।
प्रेषक – सुरेश कुमार धाकड़ बाला खेड़ा
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