
नौकरी मिलजा जै हनुमान
नित रटूँ नाम बाबा,
आज्या काम आज ।
दे दे ईसा वरदान,
नौकरी मिल ज्या जय हनुमान ।।
सब देवों में श्रेष्ठ देव तूं,
जग में रुक्का तेरा सै ।
के राजा महाराजा,
सबको तू ही तो र देरा सै ।।
दर दर ठोकर खाते खाते,
दुखी बोलता मेरा सै ।
छोटी मोटी नहीं नौकरी,
जीवन घोर अंधेरा सै ।।
बाबा बजरंग घणा हो रहया तंग,
कोई करता ना मान सम्मान ।
नौकरी मिल ज्या जे हनुमान,
आज्या काम आज, दे दे ईसा वरदान ।
भूल चूक कोई होगी हो तै,
करदे बाबा माफ गिला ।
सबकी गाड़ी तेरे सारे,
मेरी गाड़ी दिए चला ।।
घर कुनबे में ईज्जत बणी रहे,
बुरे काम ते रहूं टलियाँ ।
दो रोटी बस मिलज्यां टैम पै,
सुख तं सोऊँ पैर फैला ।।
हे संकटहारा मेरा भाईचारा,
करता आदर मान ।
बालाजी तूं ही बता दे,
किसका के ठाया मन्नै ।
हर काम पड़या सै घाटा,
जब भी पैसा लाया मन्नै ।।
भूखा मर मर तेरे सामने,
पशु की ढाल कमाया मन्नै ।
सच्चा भक्त तेरा मैं बाबा,
समझा सदा पराया तन्नै ।।
मुंह मोड़िया तेरे क्यां का तोड़ा,
मेरी होरी जात बिराण ।
कह मुरारी हे बालाजी,
इसी दिखा दो माया आज ।
कपिल राणा को मिले नौकरी,
एक पंथ दो हो ज्या काज ।।
नरेन्द्र कौशिक तेरे गुण गावै,
सदा गूँजती रहे आवाज ।
जय भगवान भक्त की बाबा,
तेरे हाथ मे स या लाज ।।
हे पवन कुमार कुछ सोच विचार,
दे दे चरणों में स्थान ।
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