
पगड़ी सजाये सर पे श्याम सजे है दूल्हे से
पगड़ी सजाये सर पे श्याम,
सजे है दूल्हे से।
दोहा – चहल पहल हो खाटू माहि,
हर ग्यारस की रात,
श्याम प्रेमियों के होंठो पे,
केवल एक ही बात।
बने है दूल्हे से,
प्यारे प्यारे होंठों पे,
प्यारी मुस्कान है,
जिसने देखा एक बार,
हुआ कुर्बान है,
सांवरे सलोने घनश्याम,
पगड़ी सजाये सिर पे श्याम,
तर्ज – सज रहे भोले बाबा निराले।
है रूप निराला जय श्री श्याम,
मोहे मतवाला जय श्री श्याम,
हर दिन से न्यारा जय श्री श्याम,
लगता है प्यारा जय श्री श्याम,
है रंग सांवरा जय श्री श्याम,
कर दे जो बावरा जय श्री श्याम,
घुंघराले काले जय श्री श्याम,
है केश निराले जय श्री श्याम,
अखियाँ मतवारी जय श्री श्याम,
कजरारी कारी जय श्री श्याम,
चमके मुख मंडल जय श्री श्याम,
कानों में कुण्डल जय श्री श्याम,
डूबे मन सबके,
बहाई रसधार है
बैठा बन ठन के,
हमारा दिलदार है,
हाथों में है लीले की लगाम,
हर दिल को भाये जय श्री श्याम,
चित चोर चुराए जय श्री श्याम,
सोणा सांवरिया जय श्री श्याम,
है तिलक केसरिया जय श्री श्याम,
चितवन है बाँकी जय श्री श्याम,
क्या अजब है झांकी जय श्री श्याम,
हाय रूप सुहाना जय श्री श्याम,
कर दे दीवाना जय श्री श्याम,
ये ध्यान बंटे ना जय श्री श्याम,
ये नज़र हटे ना जय श्री श्याम,
मन का मतवाला जय श्री श्याम,
मेरा खाटू वाला जय श्री श्याम,
बागा पचरंगी में,
हीरे मोती लाल है,
रूप है गज़ब का,
तू लगता कमाल है,
कहता ‘बेधड़क’ है मेरे श्याम,
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