
पहली बारी में उसकी फिर होती सुनवाई है
पहली बारी में उसकी फिर होती सुनवाई है,
खाटू में जाकर जिसने दर पे अर्ज़ी लगाईं है,
सांवरिया मुरली वाला ये सब के काम बनाता,
कोई भाव से इसको पुकारे ये पल में दौड़ा आता,
खाटू की मिट्टी जिसने मस्तक पे लगाईं है,
ये तीन बाण का धारी भक्तों के मन को भाये,
लाखों नर नारी तेरे दर आकर शीश झुकाएं,
खाली ना कोई जाता दर से खुशियां पाई है,
ये पांडव कुल अवतारी दुनिया में सबसे न्यारा,
जो हार के दर पर आया बनता है उसका सहारा,
तेरे दीपक की ज्योति इस कलयुग में छाई है,
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