
पिंजरा के पंछी बोले,
रही रही के कुण्डी खोले ।
मोला पार लगादे राम,
मोला जाना है ।
जाना है राम लाला के धाम।।
राम राम के नाम ला लेवत,
फुर फुर में उड़ जाहु ।
कतको मोला पकड़बे तेहा,
तोर हाथ नई आहु ।।
कतको मोला पकड़बे मेहा,
तोर हाथ नए आहु ।
तोर चरण मा में गिर जाहु,
जीवन ला सुफल बनाहु ।।
का करहु तोर रतन सिहासन,
का तोर महल अटारी ।
मोर बर सब माटी के ढेला,
सुनले रे संगवारी ।।
सुन ले रे संगवारी ।
जब तोर संदेशा आही,
सुवना मोर तन के उड़ाही ।।
लाला चंचल राम दरश बर,
जीवन भर गुन गाइस ।
राम नाम के महिमा गाके,
दुनिया मा बगराईस ।।
बेनाम के सुनले बानी,
सुवना ये तन के परानी ।।
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