
पिछम धरा रा राज वीरा,
जग में परचा भारी,
घोड़ले रे घमको आवो जी,
म्हारा पचरंग नेजा धारी,
भालो सोवे सोवणो,
हाथो में नेजा भारी,
दुर्बलिया री बेल पधारो,
अजमल घर अवतारी,
समुन्द्र में डूबे जहाजड़ी,
बानिया बोहे तारी,
रणुजा सु आप पधारिया,
पल में जहाज तारी,
जोधाणा में भाटी हरजी,
भजन करे थारो भारी,
राजा विजय सिंह परचो मांगी,
जद हरजी अर्ज गुजारी,
कपडे वाला घोडालिया ने,
दानो चरायो भारी,
हकम हजारी शरणा पडियो,
शरणा अर्ज गुजारी,
हरी शरणा में हरजी भाटी,
शायल गाई भारी,
भक्त नविन तो करे विनति,
करो भव से पारी,
“श्रवण सिंह राजपुरोहित द्वारा प्रेषित”
सम्पर्क : +91 9096558244
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