
जय हो गणपती, जय हो गणपती
पूजे तुम्हे देवता सभी
शिव के दुलारे, जग से न्यारे
पार्वती माँ के अंखियो के तारे
हम तेरी उतारे आरती
गजमुख धारी मूषक की सवारी
सिद्धि बुद्धि खड़ी सेवा में तुम्हारी
तेरा अंश है शुभलाभ भी
दीन के सहाई महा सुखदाई
अष्टरूप तेरे बड़े फलदाई
तूने नियमति हमको दी
एकदंत तुम्ही दयावंत तुम्ही
भाग्य विधाता भगवन तुम्ही
चिंता तुम्हे है सबकी
विघ्न विनाशी अमर अविनाशी
करुणा की तेरे, हम है अभिलाषी
ज्ञान की हो तुम ज्योति
तुम ही गणनायक सिद्धि विनायक
शरण में जो आए उनके सहायक
तुम्हे कहते है मंगलमूर्ती
भवभय हारी कला है तुम्हारी
रखियो सदा ही लाज हमारी
यही चरणों में है विनती
बाधा हरने वाले देवता निराले
दीन दुखियो के तुम्ही रखवाले
तूने विपदा हरी सबकी
गजानन प्यारे दुखो के सहारे
चमका दो सारे भाग्य के सितारे
तूने सबकी है पुकार सुनी
ज्ञान गुण सागर न्याय दीवाकर
जग में ना कोई तेरे बराबर
गाए सभी महिमा तेरी
जय हो गणपती
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