
प्रभु हम पर कृपा करना
प्रभु हम पे कृपा करना,
प्रभु हम पे दया करना,
बैकुंठ तो यही है,
हृदय मे रहा करना ।
प्रभु हम पे दया करना, – २
गूंजेंगे राग बनकर,
वीणा की तर बनके,
प्रगटोगे नाथ मेरे,
ह्रदय में प्यार बनके,
हर रागिनी की धुन पर,
स्वर बनकर उठा करना
नाचेंगे मोर बनकर,
हे श्याम तेरे द्वारे।
घनश्याम छाये रहना,
बनारस के मेघ कारे,
अमृत की धार बनकर,
प्यासों पे दया करना।
तेरे वियोग में हम,
दिन रात हैं उदासी।
आपनी शरण में ले लो,
हे नाथ ब्रज के वासी,
तुम सो हम शब्द बनकर,
प्राणो मे रमा करना।
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