
बंसी दी तान सुना के
'मन मोह लिया
, कुण्डला वाले ने
बंसी दी तान सुना के
नैना दे तीर चला के ।
भरी भराई, रह गयी मटकी,
चलदी दूध, मधानी अटकी
वैरण बंसी, दिल विच खटकी
'ओह तां लै गई
, चित्त चुरा के,
सईओ नी मैं तां, हो गयी झल्ली,
तीर विछोड़े, वाले चल्ली
श्याम मिलन नू, कल्ली चल्ली
'जोगण दा
, भेस बना के
की दस्सां कुझ, वस नहीं मेरे,
पांदी फिरां, गलियाँ विच फेरे
श्याम मिलन नूं, सांझ सवेरे
'मैं तां थक्क गई
, बुला बुला के
सईओ पंथ, प्रेम दा औखा,
चलना औखा ते, कहना सौखा
श्याम मिलन दा, ऐहीओ मौका
'ओह तां मिलदा
, आप गवा के
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