
बंसी मनमोहन दी
ओ बंसी मनमोहन दी कैसी मस्तानी वजदी,
ज़माना सारा उलट गया मोतियाँ दी खान लगदी,
ओ बंसी मनमोहन दी.............
मैं गम सारे भूल गई हां जद दी वजाई प्रभु,
ऐ मेनू लगे मिशत्री तो वी मीठी मीठी भान लगदी,
वजंदा ऐ तू राधा दे लाई मैं हां तेरी की लगदी,
ओ दस मनमोहन मेनू क्यों सुनेगा तू,
वजाई सी तू गौऊआ दे लाई,मेनू क्यों सुनेगा तू,
वजायेगा तू गोपियाँ दे लाई मैं ता तेरी कुछ लगदी,
तू ता है चित चोर बड़ा पर मैं न तेरी कुछ लगदी,
वजांदा ऐ तू मीरा दे लई ओ ते दुखिआरी बड़ी,
ओ सुन मनमोहना मैं वी दुखिआरी बड़ी,
वजाई नंद गवाला दे लाई ओह ते तेरे बाल सखा,
जे मैं ना तद पैदा हुई मेरा वी कसूर बता,
वजांदा जद मोरा दे ली शांदी सावन दी घटा,
की मोर ते ने भागा वाले मेनू हूँ मोरनी बना,
वजाई सी तू ब्रह्मा दे ली जदों सारी श्रृष्टि बनी,
ओ सुन मनमोहना बड़ी सोहनी श्रृष्टि बनी,
वजाई भोले शंकर लई, विद्वान आइयाँ जदों,
ओ सुन मनमोहनिया आज वी उथे बेठा है ओह,
वजांदा जद सावन विच ब्रिज वासी झुमेगे,
राधा जी आज ढोल रही लगे आज झूले ने,
की मैं वी हूँ बोल रही लगे आज झूले ने,
की संगत सारी डोल रही लगे आज झूले ने,
की जग सारा डोल गया लगे आज झूले ने,
की भोला बाबा डोल गया लगे आज झूले ने
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.


