
बरसाना बरसाना ये है बरसाना,
बाहर पीकर गिरनें वालो यहां सम्भंल कर आना,
अपनें आप सुलझ जायेंगें,
तेरे उलझे धागे राधा रस पियोगे जब,
सोई किस्मत जागे,
सारी दुनिया छोड़ दो चाहे, ये दर भुल ना जाना,
खुद भी पियो औरों को पिलायो, प्यास बड़ाते जायो,
बरसाने से जब घर जायो, राधा नाम ही गाओ,
जब अपनों से चोट लगे तो,इस दर पे आ जाना,
श्यामा श्याम का ये नज़राना, उन प्यासो तक पहुंचाना,
नज़राना नज़राना ये है नज़राना,
महख़ाना महख़ाना ये है महख़ाना,
धाम भी है ओर नाम है ये, जी भर के पी लेगें,
आज भजंन का अवसर है अब, जी भरके जी लेगें,
जीवन की अब साझं भई है, ओर ना अब तरसाना,
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