
बरसानें में झुला पड़ गयो री
तरज़-रंग डर गयो री मोपे सांवरा
बरसानें में झूला पड़ गयो,झूला झूले
री नवल किशोर सखी री सावन
आए गयो
बरसानें में झुला पड़ गयो...
आयो सावन सखी मन भावनों,छाई
हरियाली चाहूं ओर सखी री सावन
सखी बादल गरजत बिजरी संग,ओ
घंन बरसत है घनघोर सखी री
सावन आए गयो
कहे वन वन पड़यो हिन्डोंलना,कैसे
पवन चले झकझोर सखी री सावन
बरसानें में झूला पड़ गयो झूला
झूले री नवल किशोर,सखी री
झोटा होले होले देवे सांवरा,झूलें
कुंवर किशोरी सिर मौर सखी री
झौंटा दे सखि री सब गाये रही,नाचें
मौर पपीहा करें शौर सखी री
झूलत गल बईयां डाल के,वरुणेंश
निरख़ तिन्हीं और,सखी री सावन
बाबा धसका पागल पानीपत
संपर्कंसुत्र-7206526000
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