
बरसाने गलियों में सुख दिल को मिलता है
बरसाने गलियों में,
सुख दिल को मिलता है,
मेरा बांके बिहारी भी,
इस रस को तरसता है,
तर्ज – होंठों से छू लो।
तीरथ सब धाम बसे,
इक पग यहाँ धरते ही,
जन्मों के पाप कटे,
संतो के जप तप से,
शुद्ध भजन महकता है,
इन गलियों में सखियों संग,
श्यामा सहज विहार करे,
ब्रजवासी पायल की,
यहाँ नित झंकार सुने,
यहाँ हर जोनी मुख में,
राधा नाम ही चलता है,
बरसाने की नालियों में,
दिव्य कुंजो का इत्र बहें,
जड़ हो या चेतन हो,
हर हाल में सुखी रहे,
तीनों लोक की भोर यहाँ,
सूरज यहाँ ढलता है,
जन्मों से जन्मों तक,
इन गलियों से नाता मेरा,
पूनम में चंदा ज्यों,
दिल यूँ रम जाता मेरा,
‘गोपाली’ का पागलपन,
ब्रज गलियों में पलता है,
स्वर – श्री श्यामा दासी।
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