
बरसाने वाली की रहमत ना होती
बरसाने वाली की,
रहमत ना होती,
जिंदगी क्या होती,
कुछ भी ना होती।।
तर्ज – हमें और जीने की।
राधे तेरे नाम का,
सहारा ना मिलता,
भंवर में ही रहते,
किनारा ना मिलता,
किनारे पे भी तो,
लहर आ डुबोती,
कहूंगा ना दुखड़ा,
अब मैं किसी से,
कहूं क्यों फ़साना,
तेरी गर ना नज़रे,
निगहबान होती,
नज़रों में तुम हो,
जमीं आसमां में,
सितारों में तुम हो,
तुम जो ना दिल की,
तारों में होती,
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