
बल्ले बल्ले दातिए नी बल्ले बल्ले
भगतां दे, पै गई पल्ले, दातिए बल्ले बल्ले ॥
मइया घर, आएगी तां, शगुन मनावांगे ।
राहवां विच, मइया तेरे, नैन बिछावांगे ॥
चंदन दी, चौकी ते, तैनूं बिठावांगे ।
जनम जनम दी, प्यास बुझावांगे ।
नचांगे, बन के झल्ले, दातिए बल्ले बल्ले ॥
कदों दी, उडीक तेरा, जगराता करवाउणा ए ।
पता नहीं सी, मइया तुसीं, जल्दी मन्न जाना ए ॥
भगतां ने, अज्ज तेरा, भवन सजाउणा ए ॥
मइया ने, सब दा, नसीब जगाउणा ए ।
भर देने, अज्ज साडे पल्ले, दातिए बल्ले बल्ले ॥
हर युग, विच मइया, राज ही तेरा है ।
भगतां प्याऱ्यां नूं, तेरा ही सहारा है ॥
जद जद, दातिए असीं, तैनूं ही पुकारा है ।
भगतां दी, बिगड़ी नूं, तू ही संवारा है ।
हर थां, हुक्म तेरा चले, दातिए बल्ले बल्ले ॥
अपलोडर – अनिल राममूर्ति भोपाल
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