
बहुत नाज करते हैं रहमत पे हम,
सलामत रहे तेरी नजरे करम,
तर्ज – बहुत प्यार करते है।
जिधर देखते है उधर तु ही तु है,
हर इक शय में जलवा तेरा हुबहू है,
जमाना दीवाना हो के चूमे चरण,
रहमतों का नहीं है ठिकाना,
हे दीदार तेरा दया का खजाना,
सभी शहंशाह तेरा भरते है दम,
बहुत शुक्रिया हे बड़ी मेहरबानी,
बसर हो रही है मेरी जिंदगानी,
तुम्हारी रजा में राजी है हम,
तेरी रहमतों के कर्जदार है हम,
गुनाहों पे अपने शर्मसार हैं,
हम मधुक खा रहा है यही एक गम,
गायक – श्री चित्र विचित्र जी महाराज।
प्रेषक – शेखर चौधरी।
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.
