
बांके नयन रतनार हो सखि मनवा के मोहे
बांके नयन रतनार हो,
सखि मनवा के मोहे,
शोभेलें अवध कुमार हो,
नील कमल सम श्याम शरीरा,
चितवन की लागी कटार हो,
वसन पिताम्बर बदनवा पै शोभे,
शोभेला तिलक लिलार हो,
मोर मुकुट मकराकृत कुंडल,
गल बैजन्ती माल हो,
बायें कंध धनुष सखि शोभे,
कमर निषंग और बाण हो,
अगणित मदन लजाए सखी हो,
शोभा की छाई बहार हो,
गायक – मनोज कुमार खरे।
रचनाकार – ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र।
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